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Pithoragarh: बंगापानी के मवानी-दवानी बच्चे हर रोज गरारी से सफर कर खतरे के बीच पहुंच रहे हैं स्कूल

पिथौरागढ़ जिले की बंगापानी तहसील के मवानी-दवानी के ग्रामीण 13 साल से जान जोखिम में डालकर गरारी से सफर कर रहे हैं। स्कूली बच्चों के घर पहुंचने तक अभिभावक की सांस हलक पर अटकी रहती है। पूर्व में गरारी से गिरकर तीन मौतों के बाद भी सिस्टम की नींद से नहीं जागा है और अन्य घटना का इंतजार कर रहा है। न तो गांव तक सड़क पहुंची और न अब तक आपदा से क्षतिग्रस्त पक्का पुल बन सका है। वर्ष 2013 की आपदा में गोरी नदी में बना पक्का झूलापुल बहने से मवानी-दवानी के ग्रामीणों पर समस्याओं का पहाड़ टूट पड़ा। गांव तक सड़क तो पहुंची नहीं। पुल बहने से दिक्कत और बढ़ गई। हैरानी की बात है कि 13 साल बाद भी यहां झूलापुल नहीं बन सका है। ग्राम सभा मवानी-दवानी के तोक घुरुड़ी और मनकोट के लोगों को नदी के ऊपर लगी गरारी से ही सफर करना पड़ रहा है। बच्चों के स्कूल पहुंचने के लिए भी यही गरारी एकमात्र सहारा है। हालात यह हैं कि बदहाल गरारी से सफर कर बच्चों के घर लौटने तक अभिभावकों की नजरें रास्ते पर टिकीं रहती हैं। बता दें कि हर रोज दोनों गांवों के 16 बच्चे इसी गरारी से होकर लुमती स्कूल पहुंचते हैं। यहां पक्का पुल न बनने से ग्रामीण हैरान भी हैं और परेशान भी।

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