बरसात आई नहीं कि फुरकियाझाला के ग्रामीणों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। लधिया नदी उफनती है और लोग जान हथेली पर रखकर उसे पार करते हैं। स्कूली बच्चे लहरों से लड़कर स्कूल जाते हैं। कभी बुजुर्ग, कभी गर्भवती महिलाएं हर कोई लहरों से आंख मिलाकर अपनी मंजिल तक पहुंचने की कोशिश करता है। इन लोगों को अपने हिस्से के एक अदद झूला पुल के बनने का इंतजार है जो पिछले छह साल से सरकारी दफ्तरों की फाइलों में कहीं झूल रहा है। फुरकियाझाला में लगभग 300 की आबादी हर साल बरसात में इन परिस्थितियों का सामना करती है। इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में मजबूरी भरे हालात साफ दिखाई दे रहे हैं। इस 1.38 मिनट के वीडियो से आप भी इन ग्रामीणों की पीड़ा समझिए। इसमें एक व्यक्ति ताजा हाल बता रहा है। उसकी आवाज में गुस्सा और बेबसी दोनों हैं। हैरान करने वाला दृश्य है कि स्थानीय लोग और स्कूली बच्चे किस तरह जान जोखिम में डालकर बरसात में उफनाई लधिया नदी में उतरने को मजबूर हैं। ये ग्रामीण लहरों को चीरते हुए नदी पार करते दिखते हैं। वीडियो में डर साफ दिखता है तो सिस्टम की अनदेखी और भी ज्यादा। उद्यान विभाग ने यहां एक ट्रॉली लगवाई है लेकिन वो सिर्फ जरूरी सामान ढोती है। इंसान तो अपनी हिम्मत को मन में समेटकर और जान हथेली में लेकर भाग्य के भरोसे नदी की गोद में उतर जाते हैं। ग्रामीणों ने नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य हिमानी बोहरा के माध्यम से जिला प्रशासन से जल्द झूला पुल निर्माण की मांग की है। इधर भाजपा नेता सुंदर बोहरा का कहना है कि जल्द ही सीएम पुष्कर सिंह धामी से वार्ता कर झूला पुल के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।