बागेश्वर में संघर्ष वाहिनी ने उत्तराखंड के 25 साल के हालात पर संगोष्ठी का आयोजन किया। जिला और प्रदेश के अन्य जिलों से आए विचारकों ने आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बढ़ रहे पलायन पर चिंता जताई। वक्ताओं का कहना था कि जनता शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की मांग के लिए सड़कों पर उतरी है और सरकार रजत जयंती मना रही है। संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए राज्य आंदोलनकारी रमेश कृषक ने कहा कि अलग राज्य बनने के बाद भी प्रदेश पर कॉरपोरेट का राज चल रहा है। जल, जंगल, जमीन का हक हमें नहीं मिला है। प्रभात ध्यानी ने कहा कि हमारी अवधारणा पहाड़ की जवानी, पहाड़ का पानी थी। राज्य को पहाड़ के पानी से डुबाने का प्रयास किया जा रहा है। चारू तिवारी ने कहा कि सरकार रजत जयंती मनाने में व्यस्त है, जबकि जनता शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसी समस्याओं से त्रस्त है। राज्य बनने के बाद कई सरकारी स्कूल बंद हो गए। कई गांव खाली हो गए। राज्य बनने से पहले भी लोग आंदोलन कर रहे थे, आज भी वही हाल है। उपपा के अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि प्रदेश को वह भाजपा और कांग्रेस चला रही है, जिन्हें काॅरपोरेट पाल पोस रहा है। इन पार्टियों को जनता के सरोकारों से कोई लेना-देना नहीं है। ग्रामीण उत्थान मंच के सचिव उमेश जोशी ने कहा कि प्रदेश में राजनीतिक दल मौज काट रहे हैं और जनता टकटकी लगाए विकास की बाट जोह रही है। संघर्ष वाहिनी के जिलाध्यक्ष कवि जोशी ने कहा कि पहाड़ के लोगों के हक की लड़ाई की यह शुरूआत है। उन्होंने सभी लोगों का कार्यक्रम में आने के लिए आभार जताया। कार्यक्रम में भुवन कांडपाल, योगेश पांडेय, भुवन चौबे, ईश्वर जोशी, उत्तम सिंह कोश्यारी, मनोज जोशी, भाष्कर तिवारी, अभिजीत नेगी आदि ने भी विचार रखे।