बागेश्वर जिले में आराध्यदेव भगवान बागनाथ मंदिर में चीर बंधन के साथ ही होली गायन की शुरुआत हो गई। होली गायन का 15 मार्च को छलड़ी तक बरकरार रहेगा।बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति और नगर के होल्यारों ने चीर बंधन कर कैलै बांधी चीर हो रघुनंदन राजा...से होली गायन की शुरुआत की। होली शिव के मन माही बसे काशी...का भी गायन किया। मंदिर के पुजारी नंदन सिंह रावल ने बताया कि रंग पड़ने के बाद होली शुरू हो गई है। मंदिर में चतुर्दशी के दिन जिले के विभिन्न गांवों की होली का समागम होगा। इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। यहां हेम जोशी, दलीप खेतवाल, बालादत्त तिवारी, इंद्र सिंह परिहार, केशवानंद जोशी, दीप जोशी, खीमानंद पंत, हरीश सोनी, प्रताप सिंह कबडोला, मौजूद रहे। पुंगरघाटी के 13 गांवों में भी एक साथ चीर बंधन किया गया। कपकोट के ऐठाण, गडेरा, फरसाली, असों, शामा, मल्ला दानपुर, बिचला दानपुर के कई गावों में चीर बंधन के साथ सामूहिक होली गायन की शुरुआत हो गई है। क्षेत्र के गांवों में सौ से अधिक वर्षों से होली गायन की परंपरा चली आ रही है। काफलीगैर तहसील के बोहाला, नंदीगांव, महरगांव और हन्योली में भी विधि-विधान से चीर बंधन हुआ। चीर बंधन के बाद होल्यारों ने गांव-गांव जाकर होली गायन शुरू कर दिया है। कांडा के खुनौली, खंतोली और सेरी में भी देर शाम चीर बंधन के साथ होली गायन शुरू हो गया है। होली गायन के लिए क्षेत्र के प्रवासी भी इन दिनों गांव पहुंचे हैं।