आज पितृ विसर्जन है और वाराणसी के घाट किनारे श्रद्धालुओं ने अपने पितरों का तर्पण कर उनकी मुक्ती की कामना की। ऐसी कहावत है कि काशी में मरने से मुक्ती मिलती है कहा ये भी जाता है कि प्रयाग का मुंडन काशी का पिण्डदान और गया का दण्ड पितरों को तारता है। पूरे पितृपक्ष यहां पिण्डदान करने वालों का जमावड़ा रहता है। पिशाचमोचन कुंड हो या फिर गंगा का किनारा हर ओर तर्पण करने वालों की भीड़ होती है ऐसे में पितृपक्ष के आखिरी दिन वंशजों ने अपने पितरों को तिल और जल का तर्पण किया।