काशी के सामने घाट स्थित श्री वैष्णव मठ में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुवार को अनंत श्रीविभूषित संत सम्राट जगद्गुरु श्रीमद्भागताचार्य त्रिदंडी स्वामी जी महाराज को याद किया गया। इस दाैरान भक्तों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण की, इसके बाद आरती उतारी। उनके शिष्य पीठासीन अधिकारी जगद्गुरु स्वामी संमतकुमाराचार्य ने मठ पर आए सभी भक्तों को आशीर्वाद दिया। कहा कि गुरु का स्थान भारतीय संस्कृति में सबसे ऊंचा माना गया है। 'गु' का अर्थ है अंधकार और 'रु' का अर्थ है उसे हटाने वाला। यानी गुरु वह होता है जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश देता है। गुरु पूर्णिमा को मनाने का मूल उद्देश्य अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करना होता है। गुरु पूर्णिमा से जुड़ी कई धार्मिक कथाएं हैं। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने चारों वेदों का विभाजन कर उन्हें व्यवस्थित किया था। वेदव्यास जी को 'आदि गुरु' भी कहा जाता है, और उनके सम्मान में ही इस दिन को 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा जाता है।