आध्यात्मिक नगरी काशी में हर दूसरे दिन एक व्यक्ति देहदान कर रहा है। वैदिक काल से लेकर रीतिकाल तक काशी में मृत्यु से मोक्ष की बात मानी जाती थी। वर्तमान में मृत्यु के बाद देहदान के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यह देहदान मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए किया जा रहा है, ताकि छात्र शरीर के संरचनाओं पर रिसर्च कर चिकित्सक बन सकें। अपना घर आश्रम के आंकड़ों के मुताबिक, एक साल में 158 लोगों का देहदान किया गया। अधिकतर शव बीएचयू आईएमएस को दिए जाते हैं। आश्रम के संचालक डॉ. के निरंजन बताते हैं कि जिन लोगों की पहचान नहीं हो पाती, उनके शवों को नियमानुसार आईएमएस बीएचयू को सौंप दिया जाता है।