होली के पर्व के अवसर पर नमामि गंगे ने गुलाल भरी एक मुट्ठी से रीझने वाली और भगवान शिव के जटाजूट के आघात से प्रकट चौंसठ योगिनियों के रूप में प्रतिष्ठित चौसठ्ठी देवी की आरती उतार कर जन कल्याण की कामना की। काशी के होली उत्सव धूलिवंदन की 500 वर्ष की परंपरा के तहत पूजी जाने वाली माता चौसठ्ठी के चरणों को अबीर-गुलाल से पखार कर राष्ट्र के लिए भय, बाधा से मुक्ति का वरदान मांगा गया।