कछवां क्षेत्र के नारायनपुर गांव के जिन गलियों में देश सेवा का जज्बा लेकर निकलते थे, उन्हीं गलियों व रास्तों से जब शहीद चंद्र प्रकाश पटेल का पार्थिव शरीर गुजरा तो गांव का हर शख्स सिसक पड़ा। शहीद के घर पर मंगलवार शाम चार बजे भारत माता की जय व चंद्र प्रकाश पटेल अमर रहे... के नारे लगे। शहीद की पत्नी स्नेहा ने सलामी के साथ अंतिम विदाई दी। इसके बाद तीन वर्षीय इकलौते पुत्र अयांश ने भी नम आंखों से शहीद पिता को सलामी दी। नारायनपुर गांव निवासी भारतीय सेना में कार्यरत चंद्र प्रकाश पटेल 99 बटालियन सूरजगढ़ जयपुर राजस्थान में तैनात थे। 16 दिसंबर की भोर में बंकर में बारूद फटने से चंद्र प्रकाश शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर मंगलवार शाम चार बजे उनके पैतृक गांव लाया गया। शाम करीब पांच बजे गांव से जब आर्मी के जवानों ने पार्थिव शरीर उठाया तो हर आंख नम हो गई। इसके बाद आर्मी के जवानों ने राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी। सेना के अधिकारियों के साथ जिले आला अधिकारियों ने तिरंगा शहीद की पत्नी स्नेहा को सौंपा। इसके बाद शहीद की पत्नी स्नेहा ने पुत्र अयांश का हाथ पकड़कर सलामी दिलाई और स्वयं अंतिम विदाई दी। अन्य लोगों के साथ पत्नी सुमन ने पति की शहादत के नारे लगाए। इसके बाद सेना के जवानों, एसडीएम सदर गुलाब चंद्र, सीओ सदर अमर बहादुर शहीद जवान का पार्थिव शरीर लेकर अदलपुरा घाट गए। एसडीएम सदर गुलाब चंद्र ने बताया कि बंकर में विस्फोट होने के कारण चंद्रप्रकाश शहीद हो गए थे। उनको राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।