माताएं अपने पुत्र के आरोग्य और दीर्घायु के लिए बुधवार को जीवित्पुत्रिका का निराजल व्रत रखेंगी। घरों से लेकर मंदिरों तक जीमूतवाहन की पूजा होगी। व्रती महिलाएं कथा का श्रवण करेंगी। संतान की संख्यानुसार सोने या चांदी की जीउतिया धारण कर व्रत के अनुष्ठान पूरे करेंगी और दान-पुण्य भी करेंगी। इसी दिन श्रद्धालु मां लक्ष्मी के लिए व्रत रखकर पूजा करेंगे। लक्ष्मीकुंड पर पूजन के लिए भीड़ होगी। यहां लगे 16 दिवसीय सोरहिया मेला का समापन होगा।