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58 वर्ष पहले खेल-खेल में शुरू हुई थी हुकुलगंज की रामलीला आज परंपरा बन चुकी है

श्रीरामलीला समिति (हुकुलगंज) के तत्वावधान में हर वर्ष की भांति इस बार भी रामलीला का शुभारंभ हुआ। समिति के संस्थापक अध्यक्ष ने बताया कि 58 वर्ष पहले खेल-खेल में इस लीला की शुरुआत हुई थी। उस समय मुन्नू उपाध्याय ने प्रभु श्रीराम का किरदार निभाया था। मंचन ऐसा था कि पहले ही आयोजन में सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। जबकि उस वक्त सोशल मीडिया का दाैर भी नहीं था। समिति के अध्यक्ष और स्थानीय पार्षद बृजेश चंद श्रीवास्तव ने बताया कि इस आयोजन में युवाओं की सराहनीय भूमिका होती है। वे लोग अपनी सनातन परंपरा और खासताैर से प्रभु श्रीराम की छवि को लेकर काफी गंभीर रहते हैं। शुरुआत से अंत तक युवा कलाकार बड़े-बुजुर्गों के साथ लीला का मंचन करते-करवाते हैं। इस बार करीब 50 कलाकार हिस्सा लेते हैं। बुजुर्गों के आशीर्वाद से 2010 से मैं इस आयोजन का औपचारिक रुप से संभाल रहा हूं। इसके पहले भी मैं समिति के पद पर रहकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करता रहा। राजू बाबू ने बताया कि कारोनो जैसी वैश्विक महामारी में जब भारत में इस वायरस का प्रकोप आया, तब समिति के पांच लोग दूरी बनाकर हुकुलगंज के सर्वेश्वर महादेव के मंदिर में एकत्रित होते थे। लाउडस्पीकर लगाकर रामायण इस लीला का माैखिक मंचन होता था। इससे परंपरा का स्वरुप बन चुका यह आयोजन कभी रूका नहीं। इस दाैरान मोहल्ले के लोगों की उपस्थिति रही। मुकुट पूजन के साथ रामलीला का विधि-विधान से शुभारंभ हुआ।

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