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बीएचयू की डेंटल इम्प्लांटोलॉजी कार्यशाला के पहले दो दिन लाइव सर्जरी से चिह्नित, VIDEO

अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 18 Jan 2026 01:53 PM IST

वाराणसी। बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) के दंत विज्ञान संकाय में आयोजित डेंटल इम्प्लांटोलॉजी पर 7 दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला के पहले दो दिन लाइव सर्जिकल प्रक्रियाओं और उन्नत इम्प्लांट तकनीकों के साथ संपन्न हुए। “डेंटल इम्प्लांटोलॉजी: डायग्नोसिस एवं प्लानिंग से लेकर निष्पादन तक” विषयक यह कार्यशाला 16 से 22 जनवरी, 2026 तक आयोजित की जा रही है, लाइव सर्जिकल सत्रों के दौरान एक प्रमुख शल्य प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया, जिसमें कंप्रेशन एवं एक्सपेंशन तकनीक का उपयोग करते हुए एक मरीज के निचले जबड़े में छह तथा ऊपरी जबड़े में पांच डेंटल इम्प्लांट लगाए गए। इस सर्जरी को प्रतिभागी दंत चिकित्सकों के समक्ष चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शित किया गया, जिससे आधुनिक इम्प्लांट प्लेसमेंट प्रोटोकॉल की व्यावहारिक जानकारी मिली। एक अन्य महत्वपूर्ण प्रदर्शन में प्रोस्थेसिस की डिजाइनिंग, निर्माण, समायोजन एवं अंतिम फिटिंग सहित संपूर्ण प्रोस्थेटिक वर्कफ्लो को प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रोस्थेटिक योजना एवं इम्प्लांट के क्लिनिकल एकीकरण का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षु दंत चिकित्सकों द्वारा विशेषज्ञों की निगरानी में दो मालवीय डेंटल इम्प्लांट सफलतापूर्वक स्थापित किए गए। इसके अतिरिक्त, एक पूर्णतः दंतहीन (एडेंटुलस) मरीज के निचले जबड़े में दो इम्प्लांट लगाए गए, जिन्हें मैग्नेटिक अटैचमेंट्स के माध्यम से रिमूवेबल डेंचर से जोड़ा गया। इस तकनीक से पहले अस्थिर रहने वाला डेंचर अत्यंत स्थिर हो गया, जिससे मरीज की बोलने की क्षमता, चबाने की दक्षता एवं चेहरे की सुंदरता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। इस कार्यशाला का प्रबंधन काइंडवे बायोरेज़ेन्स द्वारा किया जा रहा है, जो डेंटल इम्प्लांट एवं बायोमैटीरियल्स नवाचार के क्षेत्र में बीएचयू समर्थित स्टार्टअप है। आज तीसरा दिन है और यह कार्यशाला अगले चार दिन और चलेगी।

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