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बनारस की 'तिरंगा बर्फी', देश की आजादी से जुड़ा है इसका अनोखा इतिहास, VIDEO

अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 15 Aug 2025 12:04 PM IST

तिरंगा बर्फी, जिसे 'राष्ट्रीय बर्फी' भी कहा जाता है। यह बनारस की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसका इतिहास स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है। बर्फी को हाल ही में जीआई टैग भी मिला है। यह मिठाई भारतीय ध्वज के रंगों (केसरिया, सफेद, और हरा) से प्रेरित है। यह क्रांतिकारियों द्वारा गुप्त संदेशों के आदान-प्रदान और ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल की जाती थी। तिरंगा बर्फी का इतिहास आजादी से जुड़ा है। 1940 के दशक में जब अंग्रेजों ने तिरंगा फहराने पर प्रतिबंध लगा दिया था, तब बनारस के क्रांतिकारियों ने तिरंगा बर्फी का आविष्कार किया। काशी के पुराने लोग ये भी कहते हैं कि गुप्त संदेशों का आदान-प्रदान में भी इस मिठाई का उपयोग स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किया जाता था। इससे गुप्त बैठकों और गुप्त सूचनाएं पहुंचाई जाती थीं। इस ऐतिहासिक मिठाई को बनारस के पक्के मोहाल के बीचों बीच बसे चौखम्भा इलाके में पहली बार राम भंडार नामक मिठाई की दुकान में बनाया गया था, जिसकी स्थापना 1850 के आसपास हुई थी। कृष्णा गुप्ता जिनकी चौथी पीढ़ी इस दुकान को देख रही है, उन्होंने बताया कि उस समय ब्रिटिश शासन ने तिरंगा लहराने पर रोक लगा दी थी तभी हमारे दाद, परदादा और कुछ लोगों ने मिल कर तिरंगा बर्फी बनाई। तिरंगा बर्फी ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध का एक शक्तिशाली प्रतीक बन गई, क्योंकि यह भारतीय ध्वज के रंगों का प्रतिनिधित्व करती थी। यह मिठाई भारतीय ध्वज के तीन रंगों (केसरिया, सफेद और हरा) से बनाई जाती है। इसे बनाने के लिए केसर, पिस्ता, खोया और काजू जैसे प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया जाता है। तिरंगा बर्फी न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि इसका एक मजबूत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी है।

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