सावन की अष्टमी तिथि पर बृहस्पतिवार को बाबा कालभैरव का हिम शृंगार। यहां बाबा अमरनाथ और मार्कंडेय महादेव की भी झांकी सजाई गई थी। दर्शन-पूजन के लिए शयन आरती तक भीड़ उमड़ी रही। महंत परिवार के सानिध्य में पुजारी पवन उपाध्याय ने बाबा को पंचामृत एवं गंगाजल से स्नान कराकर सिंदूर का लेप लगाया। बाबा को रजत मुखौटा लगाकर देसी- विदेशी फूलों से आकर्षक शृंगार किया। मंदिर प्रांगण को बर्फ की सिल्लियों से तरह-तरह के भगवान का स्वरूप देकर सजाया गया था। 11 वैदिक ब्राह्मणों ने रुद्राभिषेक करके चरणामृत, पंचमेवा, पकवान, मिष्ठान व फल आदि का भोग लगाया। पुजारी ने बाबा की आरती उतारी की। इसके बाद दर्शन शुरू हुए। मंदिर के पास की संकरी गलियों में लगी कतार से बाबा के जयकारे गूंजते रहे। भजन संध्या में कलाकारों ने बाबा की महिमा ें गान के साथ भजनों की गंगा प्रवाहित की। वहीं, शहर के अन्य भैरों में मंदिरों में भी शृंगार व दर्शन पूजन हुआ।