प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटना के समय खदान में नौ कंप्रेशर मशीनों से ब्लास्टिंग हेतु ड्रिलिंग का काम चल रहा था। हादसा करीब दोपहर ढाई बजे उस वक्त हुआ, जब पास में ही मुख्यमंत्री का कार्यक्रम समाप्त हुए लगभग आधा घंटा ही बीता था। अचानक खदान की एक बड़ी दीवार ढह गई और भारी मलबा करीब 150 फीट नीचे गिर पड़ा, जिसमें कई मजदूर दब गए।
सूचना मिलते ही डीएम बद्रीनाथ सिंह, एसपी अभिषेक वर्मा सहित प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पास की अल्ट्राटेक, ओबरा और अन्य परियोजनाओं की राहत टीमें भी बचाव कार्य में लगीं, लेकिन खदान की गहराई के कारण रेस्क्यू में कठिनाइयाँ बनी रहीं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि 18 से अधिक मजदूर वहां कार्यरत थे। कुछ स्थानीय लोगों ने दो मजदूरों की मौत का दावा भी किया, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
डीएम बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि राहत कार्य जारी है और मलबा पूरी तरह हटने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पूरे मामले की जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड ने मौके का निरीक्षण करते हुए कहा कि बिरसा मुंडा जयंती के दिन हुई यह घटना बेहद दुखद है। सरकार पीड़ित परिवारों के साथ है और कार्य बंद किए जाने की पूर्व सूचना के बावजूद खदान में काम क्यों जारी था, इसकी जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।