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VIDEO : Sultanpur: गोमती नदी किनारे पनपा जैकेट उद्योग, महिलाओं को मिला रोजगार, संवर गए परिवार

ishwar ashish Updated Sat, 14 Dec 2024 06:20 PM IST

गोमती नदी के किनारे बीहड़ में रोजगार की उम्मीद बेमानी सी दिखती है। पर, सखौली खुर्द की मंजू पाल ने अपने साथ छः और परिवार को जैकेट उद्योग से जोड़कर उन्हें भी रोजगार दिया। लोगों के ठंड से बचाने के लिए मंजू के घर में अब भी छः महिलाएं सिलाई - कटाई करके आय अर्जित कर रही हैं। दरअसल, 2016 में काजल महिला स्वयं सहायता समूह के जरिये मंजू पाल ने अपने रोजगार की तलाश शुरू की। करीब तीन साल बाद उन्होंने दो सिलाई मशीन से जैकेट बनाने का काम शुरू कर दिया। काम ने गति पकड़ी तो पंजाब में रेडीमेड कपड़ो के काम से जुड़े उनके पति दिनेश पाल भी नौकरी छोड़कर गांव आ गए। पति - पत्नी ने मेहनत करके जैकेट बनाने का काम शुरू कर दिया। काम चल निकला तो पति ने लंभुआ बाजार में अपनी दुकान खोल ली। बकौल मंजू पाल - उनके यहां बने जैकेट चांदा व दियरा की दुकान पर आसानी से बिक जाते हैं। गांव की बालिकाएं व महिलाएं भी इन्हीं के यहां प्रशिक्षण प्राप्त करके जैकेट बनाने के काम में लगी हुई हैं। बीते साल से मंजू ने ब्लेजर बनाने का काम भी शुरू कर दिया है। अत्याधुनिक पांच सिलाई मशीन के अलावा कटिंग व अन्य मशीन भी खरीद करके उन्होंने इस उद्योग को मजबूत कर लिया है। उन्होंने बताया कि गांव की महिलाएं जैकेट व ब्लेजर बनाकर खासी आय अर्जित कर रही हैं। उनके उद्योग में उनके गांव की महिलाएं और बालिकाएं ही काम करते हैं। स्कूल ड्रेस - टी शर्ट व लोवर की रहती है डिमांड लंभुआ। सर्दी शुरू होने के पहले ही मंजू पाल के गोदाम में जैकेट व ब्लेजर काफी मात्रा में तैयार हो जाते हैं। जिन्हें चांदा, दियरा व लंभुआ की दुकानों पर भेज दिया जाता है। अन्य दिनों में इस उद्योग में स्कूल ड्रेस, टी-शर्ट व लोअर भी बनाए जाते हैं। मंजू पाल ने बताया कि कई विद्यालय उन्हें सीधे तौर पर स्कूल ड्रेस का आर्डर करते हैं। उनकी डिमांड के मुताबिक वे स्कूल ड्रेस तैयार करती हैं और उन्हें उचित मूल्य पर उपलब्ध करा देती हैं।

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