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VIDEO: श्रीलंका के अनुयायियों ने बुद्ध की प्रतिमा लेकर की जेतवन में परिक्रमा

श्रीलंका के अनुयायियों का 40 सदस्यीय दल रविवार को दर्शन-पूजन के लिए बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु दीपालोक के नेतृत्व में बुद्ध की प्रतिमा हाथ में लेकर पारंपरिक तरीके से जेतवन परिसर में परिक्रमा व दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया। बौद्ध सभा को संबोधित करते भिक्षु दीपालोक ने कहा कि बुद्ध दर्शन के मध्यम मार्ग का सूक्ष्म दार्शनिक स्तर भिन्न है लेकिन लौकिकता के स्तर पर ये अतिवादी व्यवहार से बचने का ज्ञान देता है। बुद्ध दर्शन में संवेदनशीलता भी प्रमुख विचार है। जिसका तात्पर्य दूसरों के दुखों को अनुभव करने की क्षमता से है। वर्तमान में मनोविज्ञान जिसे समानुभूति कहता है, वो वही है जिसे भारत में संवेदनशीलता कहा जाता रहा है। बुद्ध दर्शन का चौथा प्रमुख विचार यह है कि वे परलोकवाद की बजाय इहलोकवाद पर अधिक बल देते हैं। बुद्ध के समय प्रचलित दर्शनों में चार्वाक के अलावा लगभग सभी दर्शन परलोक पर अधिक ध्यान दे रहे थे। बुद्ध ने जानबूझकर अधिकांश पारलौकिक धारणाओं को खारिज किया। बुद्ध दर्शन का पांचवा प्रमुख विचार यह है कि वे व्यक्ति को अहंकार से मुक्त होने की सलाह देते हैं। अहंकार का अर्थ है मैं की भावना से है और यही मैं अधिकांश झगड़ों की जड़ है। ऐसे में अपने व्यक्तित्व पर अहंकार करना एकदम निरर्थक है। बुद्ध दर्शन का छठा प्रमुख विचार ह्रदय परिवर्तन के विश्वास से संबंधित है। बुद्ध को इस बात पर अत्यधिक विश्वास था कि हर व्यक्ति के भीतर अच्छा बनने की संभावनाएं होती हैं, ज़रूरी यह है की उस पर विश्वास किया जाए।

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