श्रावस्ती में दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में समाहित करना हमारा मुख्य उद्देश्य है। प्रायः हम यह धारणा बना लेते हैं कि दिव्यांग बच्चे अपनी दिव्यांगता के कारण स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकते। लेकिन हमारा भ्रम होता है। आज विभिन्न श्रेणी के दिव्यांगों ने यह साबित कर दिया है कि दिव्यांगता अभिशाप नहीं है। यदि इन्हें अवसर दिया जाए तो यह बच्चे भी सामान्य बच्चों की तरह बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। यह बातें सोमवार को बीआरसी सिरसिया में बीएसए अजय कुमार गुप्ता ने कहीं। खंड शिक्षा अधिकारी राजकिशोर ने कहा कि भगवान ने दिव्यांग बच्चों को कई गुणों से परिपूर्ण किया है। आवश्यकता इस बात की है कि इन बच्चों को उनकी प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए अवसर प्रदान किया जाए। समग्र शिक्षा अभियान में ऐसे बच्चों के विकास के लिए तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं। जिनके माध्यम से यह बच्चे विद्यालयों में नामांकित होकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। एलिम्को कानपुर के सहयोग से उपकरण पाने के बाद इन बच्चों का आत्मविश्वास स्पष्ट दिख रहा है। उन्होंने अभिभावकों से अपील किया कि वह ऐसे गंभीर दिव्यांग बच्चे जो अपनी गंभीर दिव्यांगता के कारण विद्यालय नहीं जा पाते उनको नियमित रूप से विद्यालय भेजें। जिला समन्वयक अजीत कुमार उपाध्याय बताया कि 14 सितम्बर को मेजरमेंट कैंप में 291 बच्चों का परीक्षण एलिम्को कानपुर के विशेषज्ञों के द्वारा किया गया था। इसमें 159 बच्चों को उपकरण देने के लिए पंजीकृत किया गया। इनमें 12 बच्चों को ट्राई साइकिल, नौ बच्चों को व्हीलचेयर, सात बच्चों को सीपी चेयर, आठ बच्चों को बैसाखी, 12 बच्चों को रौलेटर, छह बच्चों को ब्रेल किट, 32 बच्चों को टीएलएम किट, छह बच्चों को छडी, 60 बच्चों को हियरिंग एड व 14 बच्चों को कैलीपर प्रदान किया गया। कैंप में आलोक शुक्ला, बलवन्त सिंह, बालकृष्ण, प्रदीप कुमार, उमाशंकर, प्रदीप कुमार, चन्द्रेश्वर यादव, अनिल कुमार व मांडवी मिश्रा मौजूद रहीं।