शाहजहांपुर के निगोही कस्बे की रहने वाली रामादेवी सत्संग समाप्त होने के बाद भोले बाबा के दर्शन के लिए भागीं लेकिन मौत मिली। भगदड़ में वह गिर पड़ीं। कई और लोग भी उनके ऊपर गिर गए। लोगों के नीचे दबने और कुचलने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। शव लेकर लौटे उनके पति हरीशरण ने हाथरस की घटना का खौफनाक मंजर बताया। मूलरूप से पीलीभीत के बिलसंडा क्षेत्र के गांव मन्निया निवासी हरीशरण करीब दस वर्ष पहले यहां आकर रेलवे क्रॉसिंग के पास मकान बनाकर रहने लगे थे। हरिशरण दवाइयों का कारोबार करते हैं। उनकी पत्नी रामा देवी की भोले बाबा में काफी आस्था थी। करीब 18 वर्षों से वह और पत्नी भोले बाबा के अनुयायी हैं। हरिशरण के मुताबिक, सत्संग में जुड़ने के बाद उनके व्यापार में तरक्की हुई थी इसलिए उनकी आस्था गहरा गई थी। पिछले सात-आठ वर्ष से हर माह भोले बाबा के सत्संग में शामिल होने जाते थे। इस बार भी रामा देवी के साथ उनके पति समेत कस्बे के अन्य कई लोग गए थे। हरिशरण ने बताया कि जैसे ही सत्संग समाप्त हुआ, कई लोग भोले बाबा का दर्शन करने के लिए भागे। उनकी पत्नी भी उस ओर गईं। तभी भगदड़ मच गई। उनकी कुचलकर मौत हो गई। बुधवार को सुबह शव निगोही लाया गया। उनका अंतिम संस्कार किया गया।