शाहजहांपुर में ग्रामीण परिवेश की महिलाएं और युवतियां चूल्हा-चौका करने के साथ ही आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। उनके बनाए जरी-जरदोजी के उत्पाद जिले के अलावा बड़े शहरों और विदेश तक में पसंद किए जा रहे। वे स्वरोजगार से जुड़कर घर का खर्च चलाने में अपनी भागीदारी निभा रही हैं। रोजा थर्मल पॉवर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चला रही है। एक गांव का चयन कर 15 जरूरतमंद महिलाओं व युवतियों को चिह्नित कर प्रशिक्षक मोहम्मद नदीम तीन महीने तक जरी-जरदोजी का कार्य सिखाते हैं। इस तरह से एक साल में 60 महिलाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जाता है। चार साल में लगभग तीन सौ महिलाओं को प्रशिक्षित करने के बाद उन्हें काम उपलब्ध कराया। अड्डा (लूम), कपड़ा, छपाई का खाका और प्रयोग होने वाली सामग्री को देकर सूट, साड़ी, लहंगा को तैयार कराते हैं। उनके डिजाइन किए कपड़े फतेहगढ़, दिल्ली, मुंबई और दुबई तक में पसंद किया। महिलाएं बताती हैं कि एक दिन में वह दो से छह सौ रुपये तक कमा लेती हैं। प्रशिक्षित महिलाओं ने अपने परिवार की अन्य लड़कियों को काम सिखाकर उन्हें रोजगार से जोड़ लिया है। महिलाएं रुपये कमाकर खुद का खर्च निकाल परिवार का सहारा भी बनी हैं। रिलायंस थर्मल पॉवर उन्हें अड्डे उपलब्ध कराकर सहयोग देती है।