परशदेपुर मंडी समिति का संचालन न होने से व्यापारियों को अपने उत्पादन के क्रय विक्रय में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसका सबसे मुख्य कारण मंडी का संचालन न होना है। वही, मंडी समिति में जगह जगह फैली गंदगी टूटे टीन शेड व लोगों द्वारा किया गया अतिक्रमण इस बात की गवाही दे रहे है। परशदेपुर क्षेत्र के व्यापारियों की सुविधा के लिए मंडी समिति का निर्माण कराया गया परन्तु आज यह अपनी बदहाली पर आंशू बहा रहा है। मजबूरन स्थानीय व्यापारियों को मंडी करने के लिए 30 किलो मीटर दूर अमेठी जनपद के बहादुरपुर (जायस) य 8 किलो मीटर दूर सलोन मंडी जाना पड़ता है। जोकि मटियारा चौराहे पर व्यापारियों व किसानों की समस्या को देखते हुए पूर्व प्रधानमन्त्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने 1990 मंडी समिति का शिलान्यास किया था।मंडी समिति का निर्माण हुए 35 वर्ष बीत जाने के बाद भी विभाग के अधिकारियो की लापरवाही की वजह से मण्डी का संचालन नही हुआ। जिसकी वजह से मंडी के अधिकतर भूभाग पर भू माफियो ने कब्जा कर लिया है। और बुनियादी ढांचा टीन शेड क्षतिग्रस्त हो गए है।वही मंडी समिति अब पशुगाह बन गया है। दुकानों की जगह पशु बांधे जा रहे है। वही आलू के सीजन में स्थानीय व्यापारी की चहल कदमी कुछ दिन के लिए बढ़ जाती है उसके बाद फिर सन्नाटा छाया रहता है। आलू व्यापारी गोदाम के रूप में इसे इस्तमाल करते है। मण्डी के इतंजार में व्यापारियों के हाथ सिर्फ निरासा ही लगी। मण्डी न लगने की वजह से व्यापारियो सहित किसानो को काफी समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है।क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज को बेचने के लिए सुबह सलोन मंडी जाना पड़ता है, जिससे काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।