रायबरेली जिले में पारा 43 के पार पहुंच चुका है। ऐसे में लोग हीट स्ट्रोक के चपेट में आ रहे हैं। चिलचिलाती धूप और बढ़े तापमान को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी 19 सीएचसी में कोल्ड वार्ड तैयार कराया है, लेकिन ये वार्ड काम नहीं आ रहे हैं। लालगंज में कोल्ड वार्ड में ताला लटका रहा तो बछरावां सहित कई सीएचसी में मरीज इन वार्डों में पसीना बहा रहे हैं। गर्मी अधिक होने और बिजली कटौती के कारण वार्ड ठंडे नहीं हो पा रहे हैं। इन वार्डों में लगाए गए कूलर और पंखे गर्मी के आगे फेल हो रहे हैं। जिले में लोग लू की चपेट में आ रहे हैं। शासन की मंशा पर जिले की सभी सीएचसी में कोल्ड वार्ड स्थापित तो करा दिए गए हैं, लेकिन वार्डों के ठंडे न होने के कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लालगंज सहित कई सीएचसी में तो कोल्ड वार्ड में ताला ही नहीं खोला गया है। लू के चपेट में आने वाले मरीजों को भी सामान्य वार्ड में भर्ती करके इलाज किया जा रहा है। लू की चपेट में आने वाले मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड का हीट स्ट्रोक वार्ड तैयार है। इस वार्ड में एसी भी लगवाई गई है। अन्य तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं, लेकिन सीएचसी स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। क्या है हीट स्ट्रोक, कैसे करें बचाव जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना का कहना है कि हीट स्ट्रोक एक चिकित्सीय आपातकालीन स्थिति है। यह तब होती है जब लंबे समय तक उच्च तापमान या गर्म और आद्र्र परिस्थितियों में शारीरिक परिश्रम के कारण शरीर का मुख्य तापमान सामान्य स्तर से 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बढ़ जाता है। हीट स्ट्रोक गर्मी से संबंधित बीमारी का एक गंभीर रूप है। इसके होने से मस्तिष्कए हृदयए गुर्दे व अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसका तुरंत इलाज न होने पर यह जानलेवा भी हो सकता है। रायबरेली के सीएमओ डॉ. नवीन चंद्रा का कहना है कि सभी सीएचसी में हीट स्ट्रोक वार्ड बनवाए गए हैं। अधीक्षकों को लू के चपेट में आने वाले मरीजों को इसी वार्ड में भर्ती करके इलाज कराने के आदेश दिए गए हैं। इस वार्ड में ओआरएस सहित अन्य दवाओं के बंदोबस्त भी कराए गए हैं।