रायबरेली में बेसिक शिक्षा के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ विरोध चल रहा है। ज्यादातर संगठन बिगुल फूंक चुके हैं। अब राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने आवाज बुलंद की। विकास भवन परिसर में जुटे शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया, फिर पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। संगठन के पदाधिकारियों ने कानून में संशोधन करने की पुरजोर मांग की। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने से पहले से काफी संख्या में शिक्षक कार्यरत हैं। इस कानून के लागू होने के बाद नई भर्ती में टीईटी अनिवार्य किया गया, लेकिन अब आए आदेश ने पहले से नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले से कार्यरत शिक्षकों ने भर्ती के समय सभी अर्हता पूरी की थी। जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने कहा कि नियुक्ति के समय सभी शिक्षकों ने आवश्यक योग्यताएं पूरी की थीं। टीईटी की अनिवार्यता शिक्षा का अधिकार अधिनियम के साथ लागू हुई थी। हाल ही में आए कोर्ट के आदेश से प्रभावित होने वाले शिक्षकों में ज्यादातर 50 से 55 वर्ष की आयु वाले हैं। इस उम्र में टीईटी की अनिवार्यता को थोपना उचित नहीं है। ऐसे में शिक्षकों पर नौकरी जाने का खतरा मंडराने लगा है। प्रदेश मंत्री डॉ. श्वेता ने कहा कि कानून में संशोधन किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके।