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आशा वर्कर ने किया प्रदर्शन, न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग

उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन ने भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू नहीं करने पर हड़ताल कर प्रदर्शन किया। आशा कर्मियों ने मांग की है कि उनको मानद स्वयंसेवक के बजाय 45 वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश के अनुरूप सरकारी कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए। आशा वर्कर्स यूनियन के सदस्यों ने सिविल लाइंस स्थित डॉ. आंबेडकर पार्क में इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने प्रदेश सरकार से प्रोत्साहन राशि के बजाय न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग की। इस मामले में आशा वर्कर ने एसीएम को ज्ञापन सौंपा। यूनियन से जुड़े वक्ताओं का कहना था कि आशा, आशा संगिनी को ईपीएफ, ईएसआई का सदस्य बनाया जाना चाहिए। सरकारी कर्मियों की तरह सेवा निवृत्ति पर ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित होना चाहिए। 10 लाख स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख का जीवन बीमा होना चाहिए। न्यूनतम वेतन लागू होने तक आशा कर्मियों को आधारभूत मानदेय 21 हजार और आशा संगिनी को 28 हजार रुपये किया जाना चाहिए। जननी सुरक्षा से जुड़े बुनियादी कार्य के अलावा अन्य कार्यों की उत्प्रेरण राशियों का निर्धारण कर नियमित और पारदर्शी ढंग से भुगतान होना चाहिए। इस दौरान अध्यक्ष निर्मला पाल, सचिव नीतू गोस्वामी, बबिता, इशरत जहां, साजिदा, मुमताज, शिल्पी, पायल और सुमन आदि आशा वर्कर मौजूद रहीं।

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