हस्तिनापुर स्थित प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 22वें दिन श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम में 120 परिवारों ने भाग लेते हुए धर्मलाभ प्राप्त किया। पूजा-अनुष्ठान का शुभारंभ मूलनायक भगवान के अभिषेक से हुआ, जबकि शांतिधारा का पुण्य लाभ कई श्रद्धालु परिवारों ने प्राप्त किया। विधान के दौरान मुनि भाव भूषण महाराज ने शांति विधान की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि इस अनुष्ठान से रोग, शोक, दुख, दारिद्र्य और महामारी जैसे कष्टों का निवारण होता है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में मथुरा नगरी में शांति विधान के प्रभाव से उपद्रव और महामारी का अंत हुआ था, जिसके बाद से इस विधान का विशेष महत्व माना जाता है। मुनि श्री ने कहा कि 40 दिनों तक संकल्पपूर्वक किए गए शांति विधान से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है तथा समाज में खुशहाली बढ़ती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के अंतर्गत संगीतमय आरती, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रश्नमंच प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।