मेरठ के सरधना में सलावा गांव के विवाद में दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी। इस दौरान दोनों ओर के लोग घायल हुए और दोनों पक्षों का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया। इसके बावजूद पुलिस ने केवल सोनित सोम पक्ष की तहरीर पर ही मुकदमा दर्ज किया, जबकि दूसरे पक्ष द्वारा दी गई तहरीर पर कार्रवाई नहीं की गई। आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने बिना विवेचना के एकतरफा कार्रवाई की है, जो संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन है। नेताओं ने इसे राजनीतिक दबाव और धार्मिक द्वेष से प्रेरित बताया। आजाद समाज पार्टी ने प्रशासन द्वारा मुस्लिम परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाकर की गई कार्रवाई को भी एकतरफा दमनकारी नीति करार दिया। उनका कहना है कि गरीब परिवारों की मेहनत की कमाई से बने घरों को ध्वस्त कर यह सिद्ध कर दिया गया है कि प्रशासन स्थानीय भाजपा नेताओं के दबाव में काम कर रहा है।