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दिव्यांग नंदू ने ट्राइसाइकिल को बना दिया जीविकोपार्जन का सहारा, VIDEO

अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 17 Nov 2025 05:58 PM IST

कहते हैं हौसला और इरादे बुलंद हो तो इंसा कुछ भी कर सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण मऊ के दिव्यांग नंदू यादव हैं। दोनों पैर से दिव्यांग होते हुए उन्होंने ट्राइसाइकल को ही अपने जीविकोपार्जन का साधन बना लिया है। प्रतिदिन मेहनत से 80 लीटर दूध बेचकर अपने परिवार को परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। इसके साथ ही अपने लड़के को कान्वेंट स्कूल में पढ़ाकर एक अच्छी शिक्षा भी दे रहे हैं। नगर के सिकटिया निवासी नंदू यादव ने बताया कि वे जब दस साल के थे तभी उनका दोनों पैर खराब हो या। वह दोनों पैरों से दिव्यांग हो गए। लेकिन उन्होंने कभी हौसला नही हारे। उन्हें एक ट्राइसाइकल मिली। जिसे उन्होंने अपने जीविकोपार्जन का सहारा बना लिया। वे बीते 2011 से प्रतिदिन ढाई बजे भोज में उठकर 60 किलोमीटर ट्राइसाइकल को चलाकर 80 लीटर दूध इकट्ठा करके नगर के विभिन्न घरों में दोपहर 3 बजे तक दूध बांटते हैं। उन्होंने बताया कि वे मऊ से बहादुरगंज,रतनपुरा समेत अन्य जगहों पर लोगों को दूध देने जाते हैं। उनकी मेहनत से जो पैसा मिलता है, वह उस पैसे से अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। क से करो फिर ख से खाओ दिव्यांग नंदू यादव ने बताया कि लोग आजकल बेरोजगार होने की बात करते हैं। जबकि इंसान चाहे तो कुछ भी कर सकता है। सरकारी और प्राइवेट नौकरी के भरोसे बैठने से अच्छा है अपना कुछ काम करें। उन्होने कहा कि हमारे पूर्वजों ने कहा कि क से करो फिर ख से खाओ। जब करोगे नही तो फिर खाओगे कैसे।

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