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खेती की लागत घटाने को शोध किसानों तक पहुंचे: केंद्रीय मंत्री जयंत चाैधरी

कृषि अनुसंधान और आधुनिक तकनीक किसानों तक पहुंचने से खेती की लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा। बकरी पालक एफपीओ बनाकर अपने उत्पादों की मार्केटिंग करें और युवा कृषि आधारित रोजगार अपनाएं। केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत सिंह ने शुक्रवार को मखदूम स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी) में पीएम-किसान उत्सव दिवस पर यह बात कही। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी की, जिसका सीधा प्रसारण किया गया। जयंत ने कहा कि योजना के तहत अब तक किसानों के खातों में 4.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुके हैं। उन्होंने पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री चौधरी अजित सिंह के कृषि अनुसंधान और आधुनिकीकरण में योगदान को याद किया। मथुरा के किसानों और कृषि संस्थानों की मांगें केंद्र व प्रदेश सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिया। उन्होंने पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन को आय के अतिरिक्त साधन बताते हुए सांसद निधि से पशु चिकित्सालय को एंबुलेंस देने तथा मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का उल्लेख किया। कौशल विकास मंत्रालय के माध्यम से युवाओं को कृषि प्रसंस्करण, पशुपालन और उद्यमिता से जोड़ने पर भी जोर दिया। निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली ने बकरी पालन को बढ़ावा देने में संस्थान के अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन की जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य, उर्वरता और टिकाऊ खेती के तरीके बताए। ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत भूमि व प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री ठाकुर तेजपाल सिंह, विधायक योगेश नौहवार एवं चौधरी प्रदीप सिंह गुड्डू, जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह, विधानसभा अध्यक्ष जयवीर सिंह भूड़री, राजपाल भारंगर, अनूप चौधरी, प्रमुख प्रतीक भारंगर आदि रहे।

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