वृंदावन में उत्तर भारत में दक्षिण भारतीय शैली के सबसे बड़े श्री रंगनाथ मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव के अष्टम दिवस पर भव्य आतिशबाजी और अद्भुत भील लीला का आयोजन किया गया। चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को देर शाम भगवान रंगनाथ की सवारी स्वर्ण निर्मित घोड़े पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकली। बेशकीमती आभूषणों से सुसज्जित भगवान के एक हाथ में चांदी का भाला, दूसरे में घोड़े की लगाम, पीठ पर ढाल, कमर में तलवार और रत्नजड़ित जूतियां भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रही थीं। मंदिर से निकलकर सवारी नगर भ्रमण करते हुए जब बड़ा बगीचा पहुंची तो वहां भव्य आतिशबाजी का आयोजन किया गया। करीब एक घंटे तक चली आतिशबाजी ने श्रद्धालुओं को रोमांचित कर दिया। इस दौरान आतिशबाजों ने अपने हुनर से किला, हनुमान जी, मोर, श्री, राधे-राधे, और गज-ग्राह युद्ध लीला जैसी आकृतियां प्रस्तुत कीं, जिन्हें देख भक्त आनंदित हो उठे।