लाठियों और ढाल के अद्भुत अनोखे रंग से गुलजार हो उठी बरसाना की गलियां। हुरियारिनों ने मस्ती में डूबे हुरियारों पर लाठियां बरसाईं तो मस्ती में डूबे हुरियारों द्वारा ढालों की ओट में खुद को बचाने की लीला जब रंग-रंगीले बरसाना में हुई तो मानो द्वापर युग सजीव हो उठा। लठामार होली की लीला की जीवंतता का आलम ऐसा था कि इसे देखने आंखें लालायित थीं और दिल इस रंग से सराबोर होने को मचल उठते हैं।