मथुरा के महावन में भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ा स्थली गोकुल में छड़ी मार होली खेली गई। इसमें गोकुल की ग्वालिनों ने कान्हा स्वरूप हुरियारों पर प्रेम से पगी छड़ियां बरसाईं। गोकुल की गलियों में होली की धूम मच गई। हर तरफ गुलाल उड़ने लगा। सतरंगी अंबर के बीच चारों तरफ रसियाओं की आवाज गूंजने लगी। होरी के रसिया और टेसू के फूलों से बने रंग में सराबोर होकर श्रद्धालु आंनद लेते रहे। सुबह दस बजे नंद भवन नंदकिला से ठाकुरजी का डोला निकाला गया। डोला नंद भवन से बीच चौक, नंद चौक होकर मुरलीधर घाट पर पहुंचा। मंदिर सेवायत पुजारी मथुरा दास ने ठाकुरजी की आरती उतारी। गोकुल वासियों ने गली-गली में डोला का फूलों की बरसात कर स्वागत किया। डोला में गोकुलवासी मस्त होकर नृत्य कर रहे थे। श्रद्धालु ठाकुरजी पर पुष्प वर्षा कर स्वागत करते जयघोष करते हुए डोला के साथ निकले। गोकुल की ग्वालिन छड़ी लेकर डोला के साथ साथ चल रहीं थीं। हंसी ठिठोली करते हुए ग्वाल-ग्वालिन गोकुल की गलियों से गुजरते हुए मुरलीधर घाट पर पहुंचे।