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VIDEO: दिल्ली से वृंदावन पहुंचे पशुप्रेमी, बोले- कुत्तों से प्रेम करें, नफरत नहीं

अरुन पाराशर Updated Tue, 09 Dec 2025 07:58 PM IST

धर्मनगरी वृंदावन में मंगलवार को देशभर के पशु प्रेमियों ने कुत्तों के पक्ष में करुणा और अत्याचार के खिलाफ आक्रोश जताया। एक के अपराध की सजा पूरी प्रजाति को क्यों? इसी सवाल को लेकर देशभर के करीब 500 पशु प्रेमियों की दिल्ली से सोमवार को शुरू हुई पदयात्रा वृंदावन पहुंची। पदयात्रियों ने नगर के गांधी पार्क में पशुओं को दी जा रही सजा का विरोध एवं उनके प्रति दया का भाव रखने का संदेश दिया। छह माह तक भारत भ्रमण पर निकले पदयात्री ने ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन कर कुत्तों के विरुद्ध कार्रवाई करने वालों को सद्बुद्धि की प्रार्थना की। यह यात्रा बुधवार सुबह काशी विश्वनाथ के लिए रवाना होगी। बिना किसी संगठन, झंडा या बैनर के पूरी तरह सामूहिक नागरिक सहभागिता के रूप में चल रही यात्रा में शामिल पदयात्रियों ने कहा कि हालात इतने विडंबनापूर्ण हैं कि एक तरफ दुष्कर्म के आरोपी जमानत पर बाहर घूम रहे हैं और दूसरी ओर बिना किसी अपराध के बेजुबान कुत्तों को जेल और शेल्टरों में बंद किया जा रहा है। पशु प्रेमियों ने कहा कि हम भैरव बाबा को पूजते हैं जिन्हें कुत्तों का संरक्षक माना जाता है तो फिर उन्हीं के बच्चों पर अत्याचार क्यों? एक तरफ गाय को माता कहते हैं दूसरी तरफ देश में गोवंश कट रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल पशुओं का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज के नैतिक पतन और संवेदना के संकट का सवाल है। हाउस आफ स्ट्रे एनिमल्स के संयोजक संजय मोहा पात्रा ने कहा कि एक कुत्ते के काटने की सजा पूरी प्रजाति को नसबंदी और कैद देकर नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने चेताया कि यदि कुत्तों को हटाकर बंद कर दिया गया तो बिल्लियां, चूहे और कीड़े मकोड़े तेजी से बढ़ेंगे, जिससे प्राकृतिक चक्र टूटेगा और महामारी फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। यह फैसला प्रकृति और मानव दोनों के लिए घातक साबित होगा। दिल्ली की समाजसेविका रेनू मां ने कहा कि बचपन से उन्हें समाज ने ठुकराया, लेकिन अगर किसी ने उन्हें बिना शर्त प्रेम दिया तो ये जानवर ही थे। आज वही जानवर सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। दिल्ली के पशु अधिकार कार्यकर्ता प्रणव ग्रोवर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भारत से कुत्तों और अन्य पशुओं को मीट के लिए एक्सपोर्ट किया जा रहा है और इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों को उठाने की कार्रवाई इसी अंतरराष्ट्रीय खेल की ओर इशारा करती है। पदयात्रियों ने वृंदावन के विभिन्न मंदिरों में दर्शन किए और सामूहिक रूप से प्रार्थना की कि सरकार एवं नीति निर्माताओं को सदबुद्धि दें और ऐसे फैसलों से बचें, जो पशुओं और पर्यावरण दोनों के लिए घातक साबित हो सकते हैं। पदयात्रा में अजय जो, जपनीत, एशली सूरी, अनाविल, आशीष सक्सेना, आशीष मल्होत्रा, ऋषि जैन, नरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।

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