पान की हरियाली से पाकिस्तान तक पहचान बनाने वाली पाली नगरी इन दिनों सर्द मौसम की मार झेल रही है। कोहरे, गलन और बढ़ी नमी ने पान की आधी बेलों को बीमार कर दिया है। महीनों की मेहनत से तैयार की गई फसल किसानों की आंखों के सामने रंग खो रही है। कुछ साल पहले बस के जरिये बरेली तक पान पहुंचाने की सुविधा बंद कर दी गई थी। उसके बाद कुछ किसान मध्य प्रदेश के शहरों में पलायन कर गए। अब कुदरत के कहर से शेष किसानों से चेहरों पर चिंता साफ झलक रही है। किसानों का कहना है कि पान की खेती सिर्फ फसल नहीं, बल्कि उनके परिवार की रोजी-रोटी है। सर्दी बढ़ते ही पत्तियों पर दाग पड़ने लगे हैं, चमक खत्म हो रही है। कोहरे की वजह से पान काले होकर जमीन पर खुद ही टपक रहे हैं। बेलों के डंठल भी इतने कमजोर हो गए हैं कि मामूली स्पर्श और हवा से पान बेल का साथ छोड़ जमीन पर गिर जाता है। व्यापारी कम दाम देने लगे हैं। मेहनत लागत भी नहीं निकल पा रही है। रोजाना लगने वाली पान की मंडी अब सप्ताह में दो दिन तक सिमट गई है।