कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित सभागार में प्री-बजट राजकोषीय कानून अनुसंधान विषय पर गोष्ठी हुई। इसमें वक्ताओं ने आगामी बजट में आयकर और जीएसटी कानूनों को सरल बनाने तथा लघु व सूक्ष्म इकाइयों को कर राहत देने की मांग प्रमुखता से उठाई। सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि मध्यम वर्ग की सुरक्षा और कर आधार के विस्तार के लिए व्यक्तिगत आयकर प्रणाली को सरल और प्रगतिशील बनाना होगा। उन्होंने लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों में देरी से भुगतान पर करारोपण समाप्त करने, मूल कर मुक्त सीमा पांच लाख रुपये करने और इसे मुद्रास्फीति से जोड़ने की मांग की। कहा कि कुछ कटौतियों को मिलाकर 1,50,000 की एकल मानक कटौती/ टॉप-अप टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था की जाए। पहले से भरा रिटर्न और फेसलेस प्रोसेसिंग के माध्यम से करदाताओं को नई व्यवस्था में स्थानांतरित किया जाए। पहले से भरा आयकर रिटर्न का दायरा बढ़ाया जाए और उनकी इलेक्ट्रॉनिक स्वीकृति की अनुमति दी जाए। छोटे करदाताओं के लिए सीधे आकलन नोटिस जारी करने की सीमा बढ़ाई जाए। 10 लाख से कम की विवादित बकाया मांगों के लिए समाधान विंडो सिस्टम लाया जाए। सीए दीप मिश्रा ने जीएसटी अधिनियम की धारा 16(2)(सी) में संशोधन, विशेष एमनेस्टी योजना लाने, जीएसटी रिटर्न में संशोधन की सुविधा और अपीलों में पूर्व-जमा की वर्तमान दर कम करने की मांग रखी। गोष्ठी में सीए शरद सिंघल, प्रदीप कुमार द्विवेदी, मनीष श्रीवास्तव, डॉ. अम्बरीश टंडन, शैलेंद्र सचान, राजीव गुप्ता, प्रशांत रस्तोगी, शिशिर शुक्ल, विनोद सचान, मुकुंद गुप्ता, आनंद सिंह, रणजीत सिंह, प्रशांत गुप्ता, राजकमल गुप्ता मौजूद रहे।