भीतरगांव विकास खंड के बड़े-बड़े दावों और नारों के बीच महरौली गांव का शालीमार बाग अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। बाहर से शानदार स्लोगन और डेंट-पेंट के जरिए इसे खूबसूरत दिखाने की कोशिश तो की गई है, लेकिन बाग के भीतर की हकीकत बेहद डरावनी है। देखरेख के अभाव में यहाँ लगे हजारों पौधे या तो सूखकर डंठल बन चुके हैं या अंतिम सांसें गिन रहे हैं। पौधों की सिंचाई के लिए पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। बाग में तैनात कर्मचारियों का अता-पता नहीं रहता, जिससे व्यवस्था पूरी तरह ठप है। जिन थालों में पौधे रोपे गए थे, पानी न मिलने के कारण उनमें गहरी दरारें पड़ चुकी हैं।