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कानपुर: गोष्ठी में वक्ता बोले- बेनामी संपत्ति मामलों में समय सीमा नहीं

कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित आयकर भवन में आयकर अधिनियम विषय पर गोष्ठी हुई। इसमें बेनामी प्रकोष्ठ, फेसलेस, संयुक्त कर निर्धारण अधिकारी के आदेशों पर चर्चा की गई। कहा गया कि यदि कोई संपत्ति किसी व्यक्ति के नाम पर है और उसे इसकी जानकारी नहीं है। तब भी वह व्यक्ति उतना ही दोषी माना जाएगा जितना कि धन लगाने वाला व्यक्ति। बेनामी संपत्ति से संबंधित मामलों में किसी प्रकार की समय-सीमा का प्रावधान नहीं है। गोष्ठी के मुख्य वक्ता चार्टर्ड अकाउंटेंट सुधींद्र जैन ने कहा कि वर्तमान में संयुक्त कर निर्धारण अधिकारी (जेएओ) और फेसलेस कर निर्धारण अधिकारी (एफएओ) की कार्यप्रणाली एक गंभीर विषय बन चुका है। कई मामलों में यह व्यवस्था अच्छी है लेकिन जटिल कर निर्धारण मामलों में पर्याप्त बहस और सुनवाई के अभाव में त्रुटिपूर्ण आदेश पारित हो रहे हैं। उन्होंने न्यास (ट्रस्ट) मामलों में हो रही त्रुटियों पर भी प्रकाश डाला। सभापति दीप कुमार मिश्र ने कहा कि इस प्रकार की अध्ययन गोष्ठियां कानून की जटिलताओं को समझने और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक होती हैं। इस मौके पर चार्टर्ड अकाउंटेंट शरद सिंघल, प्रदीप कुमार द्विवेदी, मनीष श्रीवास्तव, शरद शेखर श्रीवास्तव, राजीव गुप्ता, अलिंद गुप्ता, आशीष जौहरी, शैलेंद्र सचान, संजय शुक्ला, अरविंद नाथ सिंह, राम प्रकाश गुप्ता, ओम प्रकाश वर्मा, वीके शुक्ला, एमपी बाजपेयी, विमल बाजपेयी, अशोक शुक्ला आदि थे।

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