कानपुर में दो दशक से लगातार कम हो रही बारिश से बिसाती बाजार, यतीमखाना और खपरा मोहाल का छाता कारोबार धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। 10 से 15 साल पहले यहां आठ से 10 छाता बनाने के कारखाने थे, जो अब दो या तीन ही बचे हैं। ऊपर से सरकार ने जीएसटी लागू करने के साथ ही 12 फीसदी टैक्स लगा दिया है, जबकि पहले कोई कर नहीं लगता था। अब स्कूली बच्चों के सहारे यह कारोबार चल रहा है।