मऊरानीपुर का पुरानीमऊ क्षेत्र अपनी प्राचीनता और धार्मिक विरासत के लिए विख्यात है। यहां स्थित बड़ी माता का मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह क्षेत्र के 510 वर्षों के गौरवशाली इतिहास का साक्षी भी है। मंदिर की सबसे प्राचीन मूर्ति एक पत्थर नुमा गोल शिला है, जिन्हें भक्त श्रद्धा से बड़ी माता पुकारते हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां का नजारा देखते ही बनता है। सुबह से ही जल चढ़ाने वाले भक्तों की लंबी कतारें और रात में बांके बिहारी व भगवान शंकर के परिवार सहित दर्शनों के लिए सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में विशाल मेला लगता है, जहां दूर-दराज से आए दुकानदार अपनी दुकानें सजाते हैं। विशेषकर चैत्र नवरात्र में कुम्हारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के बर्तन, मटके और बच्चों की गोलक यहाँ की पारंपरिक पहचान हैं। मंदिर व्यवस्थापक समिति के प्रमुख अभिलाष तिवारी ने बताया कि पूर्व में मंदिर निर्माण हेतु लिया जाने वाला एक-एक रुपये का दान वर्ष 2010 में बंद कर दिया गया था। मंदिर की साज-सज्जा, धार्मिक आयोजनों और नवनिर्माण की पूरी जिम्मेदारी नवनिर्माण समिति द्वारा निभाई जाती है। चैत्र नवरात्रि को लेकर समिति ने व्यापक तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। ताकि आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को सुलभ दर्शन प्राप्त हो सकें। रात 9 बजे माता रानी की महाआरती होती है जिसमें सैकड़ो श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।