जनसंघ के संस्थापक प्रखर राष्ट्रवादी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के उपलक्ष्य में संस्मरण पखवाड़ा के तहत बुधवार को कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता प्रदेश मंत्री संचिता सिंह चौहान ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद का जीवन राष्ट्र को समर्पित था। एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे का उनका नारा केवल एक उद्घोष नहीं, बल्कि अखंड भारत के लिए उनका संकल्प था। कश्मीर से धारा 370 का हटना उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है। भारतीय इतिहास के सबसे प्रखर राष्ट्रवादियों, दूरदर्शी शिक्षाविदों और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, अदम्य साहस और अखंड भारत के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। विशिष्ट अतिथि हरिश्चंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय जनसंघ की स्थापना के बाद संसद में वे विपक्ष की एक सशक्त आवाज बनकर उभरे। जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाने के लिए डॉ. मुखर्जी ने आजीवन संघर्ष किया। विशिष्ट अतिथि सुशील उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से देश के युवाओं में राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान की भावना जागृत की देश की स्वतंत्रता के पश्चात, डॉ. श्यामा ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य किया। जिला अध्यक्ष अजीत प्रजापति ने कहा कि उनके संघर्षों के परिणामस्वरूप कश्मीर से परमिट सिस्टम समाप्त हो गया। इस अवसर पर जिला महामंत्री पीयूष गुप्ता, विनय सिंह, अजय सरोज, अमित श्रीवास्तव, अंशु कुशवाहा, विनय सिंह, सुनील यादव, श्याम बाबू यादव, पंकज मिश्रा आदि उपस्थित रहे। संचालन जिला महामंत्री अजय सिंह ने किया।