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Video: सिकुड़ते मैदानों में सिमट रहे सपने, क्रिकेट-हॉकी की प्रतिभाएं तोड़ रही दम

जिले के माध्यमिक विद्यालयों में खेल मैदान लगातार छोटे होते जाने से क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल और एथलेटिक्स जैसी प्रतियोगी खेलों की प्रतिभाएं उभरने से पहले ही दम तोड़ रही हैं। अधिकांश विद्यालयों में मैदान इतने सीमित हैं कि वहां केवल कबड्डी, खो-खो और वॉलीबॉल जैसे खेल ही कराए जा सकते हैं। बड़े मैदान की जरूरत वाले खेलों के लिए छात्रों को पर्याप्त अभ्यास का अवसर नहीं मिल पा रहा है। शहर के मारवाड़ इंटर कॉलेज, जीजीआईसी, गांधी विद्यालय समेत कई विद्यालयों में मैदानों का दायरा वर्षों में सिकुड़ गया है। ऐसे में क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल और दौड़ जैसे खेलों के इच्छुक छात्र निराश हैं। खेल शिक्षक शत्रोहन शुक्ल बताते हैं कि पर्याप्त जगह नहीं होने से नियमित अभ्यास और प्रतियोगिताओं का आयोजन संभव नहीं हो पाता, जिसका सीधा असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ता है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिभा को निखारने के लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्याप्त आकार का मैदान सबसे जरूरी होता है। मैदानों के अभाव में जिले के कई होनहार खिलाड़ी शुरुआती स्तर पर ही खेल छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। यदि समय रहते विद्यालयों में खेल मैदानों का संरक्षण और विकास नहीं किया गया तो भविष्य में जिले से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों का निकलना और कठिन हो जाएगा।

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