फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Video: गोंडा में सिकुड़ते मैदान, सिमटते सपने; खेल से दूर हो रही नई पीढ़ी

Akash Dwivedi Updated Mon, 20 Jul 2026 02:39 PM IST

माध्यमिक विद्यालयों में मान्यता के लिए खेल मैदान अनिवार्य हैं, लेकिन जिले के कई राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में मैदान सिकुड़ते जा रहे हैं। कहीं मैदान का दूसरा उपयोग होने लगा है तो कहीं रखरखाव के अभाव में झाड़ियां उग आई हैं। इसका सीधा असर खेल गतिविधियों पर पड़ा है और कई विद्यालयों में वर्षों से कोई प्रतियोगिता तक नहीं हुई। शहर के सरयू प्रसाद कन्या पाठशाला का मैदान इसकी बानगी है। कभी यहां वॉलीबॉल समेत विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित होती थीं, लेकिन अब मैदान वीरान पड़ा है। मैदान में बड़ी-बड़ी झाड़ियां और पेड़ उग आए हैं। वॉलीबॉल के लिए लगाए गए स्टैंड जंग लगने से खराब हो रहे हैं। खेल सामग्री और मैदान की अनदेखी से यहां खेल गतिविधियां लगभग पूरी तरह बंद हो गई हैं। वहीं गांधी विद्यालय, रेलवे कॉलोनी में मैदान का करीब आधा हिस्सा दूसरे उपयोग के लिए किराये पर दे दिया गया है। जिस मैदान पर कभी फुटबॉल सहित अन्य खेलों का अभ्यास होता था, वहां अब खिलाड़ियों की जगह झाड़ियां और सन्नाटा दिखाई देता है। मैदान के सीमित हो जाने से विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास और प्रतियोगिताओं का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें