नेपाल सीमा से सटे देवीपाटन मंडल मुख्यालय में मदरसे के संचालन में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह की शिकायत पर हुई जांच में जिले में मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत 357 मदरसों में से 299 का मूल डिस्पैच रजिस्टर से मिलान ही नहीं हो सका, जबकि 126 मदरसे मौके पर मिले ही नहीं। ऐसे में यहां पर तैनात करीब 800 शिक्षकों को वर्ष 2013 से 2015 के मध्य करोड़ों रुपये मानदेय दे दिए गए। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने वर्तमान में लखनऊ के समाज कल्याण विभाग में उपनिदेशक के पद पर तैनात तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह व लिपिक शमीम अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। अब इस मामले की रिपोंर्ट शासन को भेजी जानी है। इसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यह हुई थी शिकायत चार मार्च 2018 को गोंडा सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने अफसरों को शिकायत भेजी थी। कहा था कि जिले में 870 मदरसे पंजीकृत हैं। इसमें से 350 मदरसों की कागजों पर मान्यता दिखाकर फर्जी तरीके से आठ सौ शिक्षकों का मानदेय निकाला जा रहा है। जिला विकास अधिकारी कार्यालय के लिपिक शमीम अहमद कई वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में कार्यरत हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह से मिलीभगत कर मदरसों की आधुनिकीकरण समेत अन्य योजनाओं पर करोड़ों का भ्रष्टाचार किये जाने का आरोप लगाया था।