गोंडा में रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों के साथ मासूम बचपन को भी झुलसा दिया है। सिलिंडर के इंतजार में अब स्कूल की घंटी नहीं, बल्कि लाइन में खड़े रहने की मजबूरी बच्चों की दिनचर्या बनती जा रही है। सोमवार को सिविल लाइन पुलिस चौकी के सामने दोपहर की चिलचिलाती धूप में लंबी कतारें लगी थीं। सिर पर बरसाती धूप, पैरों के नीचे तपती जमीन और हाथ में पानी की बोतल-इन सबके बीच खड़ा था कक्षा दो का छात्र ओजस शर्मा। ओजस की आंखों में थकान थी, लेकिन चेहरे पर जिम्मेदारी का बोझ साफ झलक रहा था। उसने बताया कि वह सुबह छह बजे ही सिलिंडर लेने के लिए लाइन में लग गया था, लेकिन दोपहर तक भी नंबर नहीं आया। घर में टिफिन नहीं बन पाया, इसलिए स्कूल की छुट्टी करनी पड़ी। ओजस के पिता रोज कमाने वाले मजदूर हैं। एक दिन का काम छोड़ना उनके लिए मुश्किल है, इसलिए घर की जिम्मेदारी इस नन्हे कंधे पर आ गई। यह सिर्फ ओजस की कहानी नहीं, बल्कि लाइन में खड़े कई बच्चों की हकीकत है, जो पढ़ाई छोड़ मजबूरी में गैस सिलिंडर के इंतजार में खड़े हैं। कतार में महिलाएं और बुजुर्ग भी घंटों से खड़े थे। धूप और प्यास से बेहाल लोग व्यवस्था को कोसते नजर आए।