फिरोजाबाद जिले के टूंडला में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज की शटरिंग गिरने से शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में कई मजदूर घायल हो गए, जबकि 11 मजदूरों के लापता होने की आशंका है। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव कार्य पूरी रात जारी रहा, लेकिन मलबे में फंसे मजदूरों तक पहुंचना बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
घायल मजदूर जितेंद्र, विकास, साहिल और समीर ने बताया कि हादसे के वक्त रात करीब 9 बजे वे सभी पुल पर काम कर रहे थे। तभी अचानक पूरी शटरिंग भरभराकर गिर पड़ी। जितेंद्र ने कहा, “जब स्लैब गिरा तो धूल और मिट्टी का इतना तेज गुबार उठा कि आंखों के सामने अंधेरा छा गया। लगा कि अब मौत सामने है। आज भी यकीन नहीं हो रहा कि हम जिंदा हैं।” घायल मजदूरों का कहना है कि न सिर्फ उनके शरीर पर चोटें आई हैं, बल्कि वे मानसिक रूप से भी गहरे सदमे में हैं।
हादसे के तुरंत बाद रेलवे विभाग की एक उच्चस्तरीय टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में शटरिंग में तकनीकी खामी और सुरक्षा मानकों में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पुल निर्माण का कार्य फिलहाल रोक दिया है। हादसे के बाद ठेकेदार मौके से फरार हो गया, जिसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
साइट के चौकीदार सतेंद्र के अनुसार, दुर्घटना के समय पुल पर कुल 16 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें से केवल 5 मजदूर घायल अवस्था में मिले और अस्पताल भेजे गए हैं, जबकि बाकी 11 का अभी तक कोई पता नहीं चला है। प्रशासन और पुलिस को आशंका है कि वे मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बुलडोजर की मदद से मलबा हटाया जा रहा है, लेकिन मजदूरों के दबे होने की संभावना के चलते यह कार्य बेहद सावधानी से किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बुलडोजर का पंजा अगर किसी मजदूर के शरीर से टकरा गया तो गंभीर नुकसान हो सकता है। इसी वजह से बचाव अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
हालांकि प्रशासन ने अभी तक किसी जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार हादसे की गंभीरता देखते हुए हताहतों की संख्या बढ़ सकती है। फिलहाल सरकार या रेलवे की ओर से घायलों के लिए किसी मुआवजे की घोषणा नहीं की गई है। मौके पर पुलिस, प्रशासन और राहत दल लगातार राहत कार्य में जुटे हुए हैं।