एटा में मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में उचार के दौरान एक बुजुर्ग साधु की मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि मृतक के पास आधार कार्ड सहित अन्य पहचानपत्र भी थे। इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी या पुलिस की ओर से पहचान कर सूचना नहीं दी गई। गांव अघार थाना एलाऊ जिला मैनपुरी निवासी गौरव ने बताया कि बाबा रूपलाल (72) लगभग एक सप्ताह से लापता थे। उनकी तलाश की जा रही थी। साधु हो जाने के कारण सोचा कि शायद वह किसी आश्रम पर चले गए होंगे। मंगलवार की सुबह मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस से फोन आया कि उनकी मौत हो गई है। यहां पहुंचने पर पता लगा कि 4 जनवरी को मलावन थाना क्षेत्र में हाईवे पर बाबा किसी अज्ञात वाहन की चपेट में आकर घायल हो गए थे। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में हाईवे की एंबुलेंस के माध्यम से अज्ञात के रूप में उनको भर्ती कराया गया। यहां उनका उपचार भी चला मगर किसी ने उनके कपड़ों में रखे आधार कार्ड या अन्य दस्तावेज नहीं देखे। इसी लापरवाही के कारण हम लोगों को जानकारी नहीं हो सकी। बताया कि बाबा साधु बनने से पहले वह गांव के पास ही स्थित एक सरकारी इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर कार्यरत थे। सेवानिवृत्त होने के बाद घर-परिवार छोड़ दिया था। सीओ सकीट कीर्तिका सिंह ने बताया कि इस प्रकार की जानकारी नहीं है। पुलिसकर्मियों की ओर से कोई लापरवाही की गई है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।