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अध्यापक बना रहे मतदाता, बच्चों की पढ़ाई खुद के भरोसे

परिषदीय विद्यालय कहीं संसाधनों की कमी से तो कहीं शिक्षकों की अनुपलब्धता से जूझ रहे हैं। अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए सरकार के तमाम दावों और सुविधाओं पर विश्वास करके सरकारी विद्यालयों की तरफ रुख तो कर रहे हैं। लेकिन, हवा - हवाई व्यवस्थाओं के बीच इनके बच्चों को तय मानक के अनुसार शिक्षाएं नहीं मिल पा रहीं। परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार तरह - तरह के जतन करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। लेकिन, देसही देवरिया क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में जमीनी सच्चाई कुछ अलग ही है।

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