सोनबरसा गांव में ज्येष्ठ मास में सामूहिक पूजा की परंपरा निभाते हुए महिलाओं ने मारूका माता और डीह बाबा के दरबार में पहुंची। महिलाओं ने पूजा अर्चना कर गांव की सुख-समृद्धि और दैविक-भौतिक आपदाओं से रक्षा की प्रार्थना की। वहीं परंपरा के तहत कन्याओं को सत्तू खिलाया। ज्येष्ठ (मई) के महीने में मां काली और ग्राम देवता (डीह बाबा) की कृपा बनाए रखने के लिए क्षेत्र की महिलाएं सुबह स्नान कर जल और धार लेकर मां मारुका माता के दरबार में पहुंचीं। वहां विधि-विधान से जलधार चढ़ाकर और अगरबत्ती जलाकर सात दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान की शुरुआत की गई। महिलाओं ने पूरे गांव की सुख-शांति और आने वाली हर आपदा को दूर करने के लिए मां काली और डीह बाबा से आशीर्वाद मांगा। इस परंपरा की सबसे अनूठी बात यह है कि पूरे गांव से आपसी सहयोग (चंदा) इकट्ठा कर सत्तू खरीदा जाता है। इसके बाद गांव की कन्याओं और बाल-रूप छोटे बच्चों को आदरपूर्वक बिठाकर सत्तू खिलाया जाता है। सत्तू भोज के बाद बच्चे गंगा किनारे रेत में स्थित डीह बाबा के अखाड़े पर जाकर माथा टेकते हैं और गंगा नदी में हाथ-पैर धोकर वापस कार्यक्रम स्थल पर लौटते हैं। जेठ की दोपहर में गंगा की रेत इस कदर तपती है कि बच्चे नंगे पैर छटपटाते हुए दौड़ लगाते हैं, जिन्हें देखकर उपस्थित ग्रामीण जयकारे लगाकर उनका साहस बढ़ाते हैं। मारुका माता के दरबार में बच्चों के पहुंचते ही पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठता है।