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जब शिवलिंग के आगे ध्वस्त हुई अंग्रेजों की अकड़, बदलनी पड़ी रेल रूट, वीडियो में जानें इसका इतिहास

अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 14 Jul 2025 07:36 PM IST

जहां आस्था होती है, वहाँ चमत्कार भी होते हैं। चंदौली जनपद के सकलडीहा क्षेत्र स्थित प्राचीन बाबा कालेश्वरनाथ महादेव मंदिर ऐसी ही आस्था और चमत्कार का प्रतीक है। बाबा ने स्वयं अंग्रेजों की अकड़ को तोड़ा और उनकी बोगी को जल में समाधि दिया। आज भी उन दोनो अंग्रेजों की मौत का प्रमाण शिलालेख के रूप में मौजूद है। दरअसल 1928 में मुगलसराय पटना रेललाइन बिछाने का कार्य चल रहा था। चंदौली के सकलडीहा के बरठी गांव के पास शाम को रेल पटरी बिछाई गई और सुबह वह पूरी तरह से ध्वस्त हो गई। ऐसा तीन-चार दिन तक होता रहा। लोगों ने अंग्रेजों से कहा कि यहां खोदाई करें पर उन्होंने जबरन रेल पटरी बिछाई। अंग्रेज अधिकारी रॉबिन विक्टर और अलेक्जेंडर स्टॉक ने मंदिर को तोड़ते हुए जबरन रेलवे लाइन का निर्माण कराया। रेलवे लाइन के निर्माण के बाद जब ट्रायल रन के लिए अंग्रेज अधिकारी ट्रेन से पटना की ओर रवाना हुए, तो जैसे ही रेल बाबा कालेश्वरनाथ मंदिर के पास पहुंची, उसके सामने स्थित तालाब में ट्रेन की एक बोगी रहस्यमय ढंग से पलट कर समा गई। इस हादसे में रॉबिन विक्टर और अलेक्जेंडर स्टॉक की मौत तालाब में डूबने से हो गई। इस घटना के बाद अंग्रेज हुकूमत में भय और सनसनी फैल गई, और यह स्थान चमत्कारी शिवधाम के रूप में प्रसिद्ध हो गया। बताया जाता है कि मंदिर के संस्थापक बाबू बख्त सिंह को संतान नहीं हो रही थी। बाबा ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर निर्माण का आदेश दिया, साथ ही संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी दिया। बख्त सिंह ने मंदिर का निर्माण कराया और समय पर उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। आज भी उनके वंशज बाबा के अनन्य भक्त हैं और सेवा में लगे रहते हैं।

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