वनांचल क्षेत्र में स्थित राजदरी देवदरी पर्यटन केंद्र पर नये साल पर पिछले वर्ष की तुलना में सैलानी तो कुछ ज्यादा पहुंचे लेकिन वर्ष 2024 की शुरूआत में एक जनवरी को राजदरी देवदरी पर्यटन केंद्र पर 69 हजार एक सौ पचास रुपए की राजस्व की प्राप्ति हुई थी। वहीं इस वर्ष पहले दिन मात्र 71 हजार दो सौ रुपए ही राजस्व प्राप्ति हुई है।जो पिछले वर्ष से इस बार मात्र 2050 रुपए ज्यादा है। राजदरी- देवदरी जलप्रपात सैलानियों को इस बार नववर्ष पर रास नहीं आया। वर्ष के पहले दिन जलप्रपात पर 3000 से ज्यादा सैलानी पहुंचे। इससे विभाग को 71200 रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई,जो पिछले वर्ष की तुलना में नाम मात्र तक रही।पिछले पांच वर्षों में सबसे कम सैलानियों के पहुंचने रिकार्ड इस बार बन गया। देखा जाए तो एक जनवरी 2023 को बाइक, लक्जरी, टूरिस्ट वाहनों से सैलानियों का कारवां उमड़ पड़ा था। वन विभाग को रिकार्ड दो लाख 25 हजार 750 रुपए राजस्व के रूप में आमदनी हुई थी। वन विभाग को एक दिन में राजस्व प्राप्ति का यह रिकार्ड रहा। ईको टूरिज्म के तहत विकसित किए जाने के बाद भी जलप्रपात पर पर्यटक नहीं पहुंच पाए और पिछले वर्ष भी यही स्थिति बनी रही। पिछले वर्ष एक जनवरी को पर्यटकों की संख्या 1007 रही। जलप्रपात पर प्रमुख रूप से नववर्ष, स्वतंत्रता व गणतंत्र दिवस पर सैलानियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होती है। लोगों का मानना है कि वन विभाग की अपेक्षाओं पर जनपद समेत समीपवर्ती बिहार सहित वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, सोनभद्र, बलिया जनपद से इस वर्ष पूर्वाचल के स्वर्ग कहे जाने वाले राजदरी देवदरी जलप्रपात पर सैलानी नहीं पहुंच पाए।जबकि लोगों का यह भी मानना है कि विभाग की ओर से सुविधा में बढ़ोतरी भी नहीं की जा रही है। जिससे सैलानियों का रूख इस तरफ नहीं हो पा रहा है।