टांडाकला क्षेत्र के तटीय इलाकों समेत टांडाकला क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से चल रही पछुआ हवा ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। दिन भर चलने वाली बर्फीली हवाओं के कारण कनकनी और गलन में भारी इजाफा हुआ है, जिससे ग्रामीण एक बार फिर भारी ठंड का सामना करने को मजबूर हैं। दोपहर के बाद शाम ढलते ही गलन इतनी बढ़ जा रही है कि लोग घरों में दुबकने को विवश हैं। क्षेत्र के प्रगतिशील किसान इंद्रजीत पांडेय ने बताया कि पछुआ हल्का हवा का चलना खेती-किसानी के लिए बेहद फायदेमंद है। उनके अनुसार, पछुआ हवा के कारण आसमान साफ रहता है और दिन में तेज धूप निकलती है। वर्तमान में गेहूं की फसल तैयार होने की अवस्था में है, जिसके लिए गलन और कम तापमान की सख्त जरूरत है। ठंड के कारण खेतों में नमी बरकरार रहती है, जो गेहूं के बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी है। यदि इस समय ठंड कम हो गई, तो पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। पछुआ हवा चलने का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि क्षेत्र को घने कोहरे से निजात मिली है। मौसम साफ होने के चलते लोगों की दिनचर्या पटरी पर लौट आई है। ग्रामीण और किसान खेतों के किनारे या दीवारों की ओट में बैठकर धूप का आनंद लेते देखे जा रहे हैं। धूप से न केवल इंसानों को राहत मिल रही है, बल्कि मवेशी भी स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। हालांकि, सुबह और शाम के वक्त पड़ रही भीषण ठंड से बचने के लिए ग्रामीण अब भी अलाव का सहारा ले रहे हैं। रात के समय तापमान में गिरावट के कारण गलन का अहसास अधिक हो रहा है। कुल मिलाकर, यह मौसम आम जनजीवन के लिए थोड़ा कष्टकारी जरूर है, लेकिन बेहतर फसल की उम्मीद में किसान इस ठंड से खुश नजर आ रहे हैं।